ये चुप चुप सी रात बातें बहोत करती है,
कभी हमको हमसे तो कभी हमको उनसे मिलाती है.
तारों की चादर में ठंड की सिलवटें बनती ये रात…
पलकों में लपेटे ख्वाबों को जगाती ये रात.
दिल के धड़क ने की आहट सुनाती ये रात…
आंसू की सिसकियाँ दबाती ये रात.
आराम को तरसती ये बूढी सी रात…
शरारत को चाहती ये जवान सी रात.
ये चुप चुप सी रात बातें बहोत करती है,
कभी हमको हमसे तो कभी हमको उनसे मिलाती ये रात…
Good Goin bro… keep it up…
Thanx Joshibhai